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अब्राहम लिंकन की जीवनी | Abraham Lincoln Biography in Hindi

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Abraham Lincoln Biography in Hindi 

अब्राहम लिंकन की जीवनी
abraham lincoln biography in hindi

पूरा नाम अब्राहम थॉमस लिंकन
जन्म 12 फरवरी, 1809
जन्मस्थान केंटुकी (अमेरिका)
पिता थॉमस लिंकन
माता नेन्सी
शिक्षा वकालत
विवाह मेरी टॉड के साथ (1842 मे)

अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16 राष्ट्रपति थे। इनका कार्यकाल 1861 के बीच रहा था। अमेरिका में दास प्रथा के अंत का श्रेय अब्राहम लिंकन को ही जाता हैं। अब्राहम लिंकन का जन्म एक अश्वेत परिवार में हुआ था। इन्होने अमेरिका को गृह युद्ध के संकट से निकाला था। लिंकन रिपब्लिक पार्टी से थे। लिंकन का जीवन काफी मुश्किल से भारा था। अब्राहम लिंकन ने अपने जीवन में काफी संकट झेला हैं। उन्होंने बहुत सारे काम किये लेकिन वह एक के बाद एक असफल हो रहे थे। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और मेहनत करते रहे और एक दिन 1860 में अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए।

प्रारंभिक जीवन

अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फ़रवरी 1809 में केंटुकी अमेरिका में एक अश्वेत परिवार में हुआ था। अब्राहम लिंकन के पिता एक किसान थे। लिंकन का एक छोटा भाई और एक बड़ी बहन थी। जिनकी बचपन में ही मृत्यु हो गई। अब्राहम लिंकन जब 9 वर्ष के थे तब उनके माता का निधन 34 वर्ष में हो गया। लिंकन की तो पूरी दुनिया ही उजर गई। लिंकन अपने पिता से दूर - दूर रहने लगे। उनके पिता ने एक साल के बाद दूसरी शादी एक विधवा जो तीन बच्चो की माँ थी उनसे कर लिया जिनका नाम सराह बुश जॉनसन था। वो ज्यादा पढ़ी लिखी तो नहीं थी लेकिन एक मजबूत महिला थी अब्राहम लिंकन को इनसे बहुत जमती थी। इन्होने लिंकन को पढाई के लिए काफी प्रोतसाहित किया था।

अब्राहम लिंकन का शुरुआती जीवन काफी कष्टों से भरा था। जमीन विवाद के समय 1817 में इंडिआना जाना पड़ा। जहा उनका परिवार काफी मुश्किलों में जीवन यापन कर रहा था। लिंकन अपने पुरे जीवन में एक वर्ष से कम ही स्कूल गए थे। उन्होंने अपनी पूरी पढाई घर पर रह कर ही पूरा किया था। लिंकन ने शुरू में छोटे - छोटे काम किये जैसे: चौकीदार, दूकानदार बाद में उन्होंने खुद का एक जेनरल स्टोर खोल लिया। इसी दौरान उन्होंने वकालत की पढाई भी पूरी की 1837 में अब्राहम लिंकन ने राजनितिक पार्टी व्हिंग का मेंबर बने यही से उनका राजनितिक सफर शुरू हुआ।

कैरियर

अमेरिका का संबिधान आदमी की समानता पर आधारित हैं। अब्राहम लिंकन 1860 में राष्ट्रपति चूने गए उस समय अमेरिका में दास प्रथा अपने चरम सिमा पर था। अमेरिका दो भागो में बाटा जा रहा था यह उनके लिए काफी मुश्किलों का समय था। दक्षिण अमेरिका के लोग जो श्वेत थे उनके पास काफी खेत था। ऐ लोग उतरी अमेरिका से लोगो को मजदूरी के लिए बुलाते थे। और उन्हें दास बना लेते थे। इस लिए उतरी अमेरिका के लोग इस बात से सहमत नहीं थे। दूसरी तरफ दक्षिण अमेरिका के लोग एक अलग राज्य बनाना चाहते थे। लेकिन अब्राहम लिंकन इससे सहमत नहीं थे। लिंकन इस समस्या से लड़ रहे थे। क्यों की लिंकन देश की एकता को बनाये रखना चाहते थे। तब तक दक्षिण अमेरिका और उतरी अमेरिका के बिच गृह युद्ध शुरू हो गया। लिंकन ने इस समस्या से लड़ा और लिंकन की जीत हुई। और उन्होंने घोषणा की "एक राष्ट्र आधा दास और आधा बिना दास नहीं रह सकता " और उन्होंने अपने देश को टूटने से बचा लिया। अब्राहम लिंकन 1862 में घोषणा कि अब सभी दास मुक्त होंगे। इस वजह से लिंकन काफी लोकप्रिए हो गए थे।

अब्राहम लिंकन का दूसरी बार शपथ ग्रहण 4 मार्च 1865 को हुआ था। इस शपथ समारोह के बाद अब्राहम लिंकन ने जो भाषण दिया वह काफी मशहूर हुआ इस भाषण को सुनकर बहुत सारे लोगो की आँखे नम हो गई। कितने लोगो को तो आंसू निकल आये। इस भाषण में अब्राहम लिंकन ने बोला की मै किसी के खिलाफ नहीं हूँ। वह चाहते हैं की सभी लोग शांति से जीवन बिताएं। वह ऐसे महापुरुष थे जिनहोने देश और समाज की भलाई के लिए अपना पूरा जीवन समर्पण कर दिया।

अब्राहम लिंकन कभी भी धर्म के बारे में बात नहीं करते थे। एक बार उनके एक मित्र ने धर्म के बारे में पूछा तो उन्होंने इस पर कहा "जब मैं कुछ अच्छा करता हूँ तो अच्छा अनुभव करता हूँ जब कुछ बुरा करता हूँ तो बुरा अनुभव करता हूँ " यही मेरा धर्म हैं।

निधन

अब्राहम लिंकन राजधानी वासिंगटन डी सी के फोर्ड सिनेमा घर में 14 अप्रैल 1865 को एक नाटक देख रहे थे। तभी ज़ॉन विल्किज बुथ नाम के युवक ने उनको गोली मार दी। गोली लगने के बाद 15 अप्रैल के सुबह अब्राहम लिंकन की मौत हो गई।

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