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कूड़े से बने एक कामयाब कारोबारी - मानिक थापर | Success Businessman Story In Hindi

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Success Stories of Indian Entrepreneurs 

कूड़े से बने एक कामयाब कारोबारी
Successful Entrepreneurs Stories in Hindi

प्रबंधन में कुशल इनसान कूड़े से भी पैसा कमा सकता हैं और इसे सच कर दिखाया हैं35 वर्ष के मानिक थापर ने 2005 में उतर प्रदेश नोएडा के सेक्टर 21 और 25 से कूड़े के कारोबार को शुरुआत करने वाले थापर कनाडा के भी नागरिक हैं उनकी कंपनी इकोवाइज वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड देश के सात शहरो में काम करती हैंओस्ट्रिलिया और कनाडा में पढाई के बाद ओस्ट्रिलिया से उन्होंने MBA किया MBA के आखरी साल में उन्हें एक कूड़े से बिजली बनाने का प्लान बनाना था उन्होंने यह प्लान बना कर जमा कर दिया MBA करने के बाद वह दिल्ली आये और अपने पिता से कूड़े का काम शुरू करने की बात कही उनके पिता जो एयर फोर्स से रिटायर्ड हैं उन्होंने कारोबार शुरू करने में 8 लाख रुपया की मदद की थापर ने नॉएडा में काम शुरू कर दिया तब से आज तक उनकी ग्रोथ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा

थापर कहते हैं यह बहुत कैपिटल इंसेटिव कारोबार हैं अगर हम किसी कंपनी से जुड़े हुए हैं तो उसके चलने और न चलने, हमे दोनों में फायदा हैं अगर कंपनी चली तो वेस्ट निकलेगा और नहीं चली तो वह अपना सामान कबाड़ के तौर पर सस्ता में बेचेगी ये मंदी से बेअसर कारोबार हैं अमेज़न , फिलिपकार्ट , मिंत्रा इनके 40 परमामेंट क्लाइंट हैंई - कॉमर्स कंपनी के जितना वेस्ट निकलता हैं उसे हम लेते हैं और उसे हम अपने वेयरहाउस में लाते हैं फिर उनको ढुलाई के अनुकूल बनाकर रीसाइकिलिंग मील में भेज देते हैं थापर बताते हैं की रीसाइकिलिंग वेस्ट के लिए हम कंपनी को भुगतान करते हैंजबकि कूड़े के एबज में उनसे पैसे लेते हैं

थापर की कंपनी कूड़ा प्रबंधन के अलावा रीसाइकिलिंग मॉनेटाइज़शन, डॉक्युमेंट, डिस्ट्रक्शन, प्रोडक्ट डिस्ट्रक्शन, वेस्ट मॉनेटाइज़शन और फैक्टरी ल्किविडेशन जैसे काम करती हैं थापर को नोएडा साइट से 70 टन कूड़ा रोज आता हैं उनकी कंपनी रसायनिक या खतरनाक कूड़ा नहीं लेती देश में ई -वेस्ट का बाजार 95 फीसदी से ज्यादा अनधिकृत हाथो में हैं ई - वेस्ट मैनेजमेंट का लइसेंस लेकर कंपनी उसे कबाड़ियों को किराये पर दे देती हैं पहले साल की कम्पनी का टर्नओवर 12 लाख रूपये था जो इस साल बढ़कर 15 करोड़ रुपया हो गया हैं थापर को करोबार में और तेजी की उम्मीद हैं क्यों की सरकार का स्वस्छ भारत अभियान और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और प्रदूषण बोर्डो की प्रदूषण पर सख्ती के कारण इंडस्ट्री से वेस्ट मैनेजमेंट का डिमांड बढ़ गया हैं

थापर को साल दर साल 30 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी दिखती हैं अगले साल तक टर्नओवर को 25 करोड़ तक ले जाने का प्रयाश कर रहे हैं थापर कहते हैं की वेस्ट मैनेजमेंट में संगठित रूप से काम करने वाले बहुत काम प्लयेर हैं इसलिए भी हमें उम्मीद अधिक दिखती हैं हमारा 95 फीसदी फोकस इंडस्ट्री और कमर्शियल ठिकानो पर हैं 5 फीसदी रेजिडेंसियल हैं लेकिन लोगो को यह नहीं समझ में आता हैं की काबड़ी या कूड़े वाला उसमे से मतलब की चीज निकालकर बाकि उनके घर के पास ही डाल देता हैंमल्टीनेशनल कम्पनी विदेश में जिस नियमो का पालन करती हैं यहाँ उनका खुला उलंघन करती हैं विदेश में कंपनी कूड़ा उठाने का भुगतान करती हैं लेकिन हमरे देश में आकर कम्पनी बेफिक्र हो जाती हैं नियम तो बहुत हैं लेकिन उनका सख्ती से पालन नहीं कराया जाता

लोगो की मानसिकता नहीं बदली हैं लोग सोचते हैं की कूड़ा उठाना हमारी जिम्मेदारी नहीं हैं यह किसी और की जिम्मेदारी ये लोग जब विदेश जाते हैं तो खुद डॉसबीन में कूड़ा डालते हैं और उसे कूड़ा उठाने वाली कंपनी को देते हैं अगर वह कूड़ा ठीक से अलग - अलग न हो तो कंपनी कूड़ा नहीं उठती और जुर्माना भी लगाती हैं लेकिन यहाँ लोग कूड़ा छूना तौहीन समझते हैं

थापर कहते हैं सरकार ने वेस्ट मैनेजमेंट को इंडस्ट्री का दर्जा भी नहीं दिया हैं इंडस्ट्री का दर्जा नहीं होने से बैंक कर्ज नहीं देते कबाड़ी माफिया इसमें सक्रिए हैं लोग धमकी भी देते हैं थापर की योजना जल्द वेस्ट हब बनाने की हैं इसके लिए विदेशी कम्पनी से बात हो चुकी हैं वह कंपनी वेस्ट हब में निवेश भी करेगी अगले साल तक ऐसा करने की उम्मीद जाता रहे हैं अगर यह हब बना तो देश में अपनी तरह का पहला काम होगा

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