घर ढोते हैं जिनके पहिये - रमेश अग्रवाल Success Businessman Story In Hindi

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Success Stories Of Indian Businessman In Hindi 

 रमेश अग्रवाल के संघर्ष व सफलता की कहानी
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रमेश अग्रवाल ने वायु सेना में 6 साल नौकरी करने के बाद वायु सेना की नौकरी छोड़ कर अपने घर आ गए। और अपना कारोबार शुरू करने की ठानी। उस समय उनकी उम्र 24 वर्ष थी। उनके पिता पुराने ट्रक के फाइनेंसर थे। उन्होंने दो ट्रक अपने बेटे को दे दिया। कुछ दिन बाद हैदराबाद में उनके कुछ अपने पुराने एयर फोर्स अफसरों से मुलकात हुई। उन अफसरों ने अग्रवाल से कहा की यहाँ अफसरों का लगातार तबादला होता रहता हैं आप क्यों नहीं उनके सामानों की सिफ्टिंग का काम शुरू करते? अग्रवाल को यह विचार बहुत पसंद आया। लेकिन उनके पास शुरुआती पूंजी की दिक्कत थी। क्यों की यह काम शुरू करने के लिए शुरुआती तौर पर पक्की रसीद और कुछ पेपर वर्क का काम था। जिनके लिए 4000 रुपए की जरुरत थी। अग्रवाल को चिंतित देख कर उनके एक दोस्त ने अपनी माँ से 4000 रूपए की मदद करवाई। आज मेरी कम्पनी का कारोबार करोड़ों रूपए में है लेकिन उस रकम को में आज भी नहीं भूल सकता वह मेरे लिए कितनी बेशकीमती था।

उसी रकम से उन्होंने 1987 में घरेलु सामान की शिफ्टिंग के लिय अग्रवाल हाउसहोल्ड करियर नामक कम्पनी शुरू की उनका पहला काम वायु सेना के अधिकारियो की शिफ्टिंग का ही मिला। एक साल बाद उन्होंने कम्पनी का नाम बदल कर अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स लिमिटेड कर दिया। आज अग्रवाल 55 वर्ष के हो चुके है और कहते हैं की मुझे अच्छे लोग मिलते गए और आज कम्पनी को आगे बढ़ाने में बहुत मदद की।

अग्रवाल का कहना है की उसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। और औसतन 15 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ के साथ कम्पनी का कारोबार लगातार बढ़ता रहा। दिल्ली में उनका पहला दफ्तर 1889 में खुला। कम्पनी के 2015-2016 में कुल कारोबार करीब 423 करोड़ रुपया रह। आज इस कम्पनी में 2500 कर्मचारी काम करते हैं और 3000 लोग परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं इनके पास 1000 से ज्यादा ट्रक हैं और देश में 103 शाखाएं हैं 180 देशो में फ्रेंचाइजी हैं अग्रवाल के मुताबित कम्पनी अभी 1200 करोड़ रुपया की हैं

कम्पनी की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह अग्रवाल और उनके टीम को ओर से किये गये इनोवेशन हैं अपने पैकिंग सामान में इनोवेशन का ख्याल उन्हें लागत कम करने और अंतरराष्ट्रीय अस्तर की गुणवता बढ़ाने की मधेन्जर भी आया। सामान में कई सारे इनोवेशन किये उन्हें फेब्रिक शीट या हार्ड कार्डबोर्ड शीट के इनोवेसन की प्रेरणा मिली। यह वाटरप्रूफ है और स्क्रेच वैगरह से भी सामान को बचाता है। अग्रवाल बताते हैं की हमारी पैकिंग क्वालिटी बढ़ गयी हैं और लागत में भी 26 प्रतिशत की कमी आई है

कम्पनी में आईआईएम जैसे संस्थानों के स्टूडेंट इन्टर्न करने आते रहते है अग्रवाल ने उन लोगो से अध्ययन करने के लिए कहा की कम्पनी दुवारा शिफ्ट किये गए टीवी के लाइफ पर क्या असर पड़ता हैं आईआईएम अहमदाबाद के छात्रों ने उन्हें बताया की एक टीवी को पैक करने में 12 कील ठोकने के लिए 48 बार हथोरा मारना पड़ता था जिससे हर चार साल में 40 फीसदी टीवी रिपेयर होने आ जाते थे। जबकि कम्पनी टीवी की लाइफ 8 साल बताती हैं। अग्रवाल बताते है की तब हमने कार्डबोर्ड LED बॉक्स का इनोवेशन किया। इस बॉक्स का बाहरी हिस्सा कार्डबोर्ड का बना होता है और अंदुरीनी हिस्सा सॉफ्ट फोम से बना होता हैं इस बॉक्स में हथोरे मरने की जरूरत नहीं है

अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स के इनोवेसन में ट्रकिंग क्यूब बेहद अहम है जिसे कम्पनी ने 2014 में लंच किया। इसने एक ढुलाई की कई दिक्कत को दूर कर दिया है। ये 4 फुट से लेकर 20 फुट लम्बे साइज के मजबूत क्यूबिकल बॉक्स है। जिसमे ताला लगाने से लेकर तापमान एक जैसा करने की सुबिधा भी हैं। अगर रास्ते में गाड़ी खराब हो गई या शिफ्टिंग का समय या स्थान बदलना हो तो सामान को कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता हैं। उनकी कम्पनी हर साल 90000 लोगो का समान सिफ्ट करती हैं।

अग्रवाल अब ग्राहकों के लिए EMI से भुगतान की सुबिधा भी शुरू करने वाले हैं दो साल बाद आईपीओ जारी करने की योजना हैं उनकी लक्ष्य अगले नौ साल में कारोबार को दस गुणा बढ़ाने को हैं।

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