कामयाबी के सधे कदम - रमेश दुवा | Success Businessman Story In Hindi

Success Businessman Story in Hindi, Success Stories of Indian Businessman in Hindi, Successful Entrepreneurs Stories in Hindi, Success Stories of Indian Entrepreneurs in Hindi, Motivational Story in Hindi for Success.
Share it:

Business Stories 

रिलैक्सो फुटवियर की सफलता की कहानी
success stories of indian businessman in hindi

रिलैक्सो फुटवियर के प्रबंधक निदेशक रमेश दुवा कहते है की उम्र तो महज एक संख्या हैं 63 वर्ष की उम्र में भी उनकी सक्रियता उनके लिए रिलैक्सो सिर्फ एक विश्वसनीय ब्रांड ही नहीं, एक ऐसा बरगद है जिसे उन्होंने सिचं – सींचकर बड़ा किया हैं वे आज भी वह अपने बड़े भाई मुकुंद लाल के साथ फैक्ट्री का दौरा करते हैं ताकि उपभोक्ताओं की जरूरत के हिसाब से सिख सके

दुवा के लिए शुरुआत कुछ आसान नहीं रही था बटवारे के वक्त पाकिस्तान से आये उनके पिता रबड़ की चपल समेत साईकिल के पुर्जे बनाने के कारोबार में थे लेकिन 1969 में जायदाद के बंटवारे के साथ पिता पर एक लाख रुपये का कर्ज आ पड़ा था, जो उस समय के हिशाब से काफी था तब इस परिवार ने अपने जायदाद को किराये पर देकर उससे मिली पगड़ी की 10000 रूपये से अपने कारोबार की शुरुआत की लेनदेन का दबाव था और साख दाँव पर लगी थी

ऐसे में सिर्फ बारहवी पास कर पाए रमेश दुवा को कामकाज में हाथ बटाने के लिए कारोबार में आना पड़ा तब वे MBBS की परीक्षा के तैयारी में लगे थे दुवा को विज्ञान में रूचि होने के कारण रबड़ की चपल को नई पहचान देने के लिए कुछ प्रयोग करना शुरू कर दिया उन्हें ए अहसाह हो गया था की कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए कच्चे माल रबड़ को अच्छी तरह समझना होगा इस लिए वह इंग्लेंड के प्लास्टिक एंड रबड़ इंस्टिट्यूट में दाखिला लेना चाहते थे लेकिन वह नहीं मिल पाया फिर दुवा ने कहा की हमें डिग्री नहीं चाहिए हमे सिर्फ सिखने से मतलब हैं तो उन्हें इंस्टिट्यूट में शुल्क चूका कर सिखने का मौका मिल गया

कारोबार के साथ दुवा ने पढाई भी जारी रखा वह अपनी फैक्ट्री से रात 10 बजे लौटने के बाद वह 2 बजे तक पढाई करते थे दुवा ने उस समय सारा ध्यान इस और दिया की श्रमिको के लिए ऐसी टिकाऊ चपल बनाई जाये जो कम से कम साल भर चले

उस वक़्त कारोबार चलाने के लिए संजीदा लोगो के लिए भी संघर्ष कम नहीं था हर चीज के लिए लाइसेंस लेना पड़ता था और जरुरत के हिशाब से नहीं मिल पा रहा था उत्पादन के लिए कच्चा माल नहीं मिल पा रहा था काला बाजार ले खरीदनी पड़ती थी मजदुर यूनियन ने नाक में दम कर रखा था दुवा को एक अपना ब्रांड बनाने के लिए नाम की जरुरत महसूस हुई तभी रिलैक्सो नाम खोजा गया

1974 में रिलैक्सो का टर्नओवर सालाना 4 लाख रूपये था और 1977 में बढ़कर 12 लाख हो गया आज रिलैक्सो के पास 8 उत्पादन इकाई हैं और 9 इकाई अगले साल उत्पादन शुरू कर देगी कंपनी ने सालाना 28 फीसदी की विकाश दर बना रखी हैं 2015-16 में कंपनी का कारोबार 1713 करोड़ रूपये का था जिसमे 120 करोड़ का मुनाफा था जबकि कंपनी का मार्केट कैप 5952 करोड़ रूपये था

एक मात्र नीली सफेद रबड़ चपल बनाने के काम से शुरू हुई रेलैक्सो कंपनी के पास 400 से किस्म के डिजाइन हैं और 10 ब्रांड है और सभी इकाईयों को मिलाकर 50000 मजदुर काम करते हैं

ऐसा नहीं की रिलैक्सो को बाजार में मुकाबला नहीं है एक्शन, लिबर्टी, लखानी और बहुत सारे कम्पनी से इसने मुकाबला किया है दुवा कहते है की हमारी मंशा किसी को कभी हराने की नहीं रही जहा अन्य कम्पनी आउटसोर्स कराती है गुणवता बनाये रखने के लिए रिलैक्सो 90 फीसदी उत्पाद का काम इन हाउस कर रखा हैं रिलैक्सो के MD के लिए कामयाबी का मन्त्र गुणवता और पैरो के आराम का ध्यान रखना है

यह भी पढ़ें:-

Note: - आप अपने comments के माध्यम से बताएं कि Success Businessman Story In Hindi आपको कैसा लगा।
Share it:

Inspiring Entrepreneurs

Post A Comment:

0 comments: