जिद से मिली जीत | Inspiring Stories of Indian Entrepreneurs

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Success Stories of Indian Entrepreneurs in Hindi 

 जिद से मिली जीत - बुलंद होसलों की कहानी
Inspiring Stories of Indian Entrepreneurs

इंडिया में 420 अंक अमूमन धोखाधरी और जालसाजी के लिए इस्तेमाल होता हैं लेकिन मध्य प्रदेश में इंदौर के श्री 420 पापड़ की पहचान ईमानदारी और सही कीमत के लिए जाने जाते हैं श्री 420 पापड़ की शरुआत भी काफी दिलचस्प रही हैं हुकुम चन्द्र अग्रवाल श्री 420 पापड़ की शुरुआत हिंदी फिल्म श्री 420 के नाम पर की थी वह भी 500 रूपये उधार लेकर उनकी माँ दाल मिल में तगाड़ी उठाया करती थी

शुरू में इस पापड़ को प्लेन थैली में सप्लाई की जाती थी क्यों की 420 नाम का पापड़ लोग लेना नहीं चाहते थे दुकानदार अपनी मर्जी का लेवल लगा सकता था शरू में साइकिल से दुकानदारी होती थी 1962 में शहर के इतवारिया बाज़ार में एक गुमटी ली गई इस पापड़ को अपने नाम 420 के चलते करोबार में परेशानिया होती थी 1980 तक रोज 100 कोलो पापड़ बनते थे विज्ञापन का इडिया आया तो सबसे पहले स्कूटर की स्टेपनी के कवर पर विज्ञापन शुरू हुआ 1993 में कम्पनी का प्रोडक्शन 400 किलो ग्राम रोज तक पहुंच गया

1997 में अग्रवाल पापड़ प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कम्पनी का रजिस्ट्रेशन हुआ तब कम्पनी 1,000 किलो पापड़ रोज बेचने लगी आज कम्पनी के इंदौर में 18 सेंटर हैं जहा 250 लोग काम करते हैं आज कम्पनी का रोज का प्रोडक्शन 2,000 किलो पापड़ से ज्यादा का हो चूका हैं

कम्पनी के बारिश वाले चार महीने काफी चुनौती वाले होते हैं प्रोडक्शन ठप पर जाता हैं क्यों की बारिश हो जाने से पापड़ अच्छी तरह सुख नहीं पाते हैं इस वजह से कम्पनी इन दिनों इडली और खामर जैसे उत्पाद बनाने शुरू किये इसके बाद कम्पनी ने और भी प्रोडक्ट बनानी शुरू कर दी जिसमे दहीबड़ा, गुलाब जामुन, और डोसा मिक्स बाज़ार में उतारा

500 रूपये उधार लेकर शुरू हुई कम्पनी का कारोबार आज 100 करोड़ तक पहुच गया हैं वैसे तो कम्पनी का प्रोडक्ट देश भर में मिलता हैं लेकिन मध्य प्रदेश, राजस्थान, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, और उतर प्रदेश के कुछ खास इलाको में खास तौर पर पसंद किया जाता हैं

पापड़ की गुणवता बनाये रखने के लिए आज भी बेसन में मशाला मिलाने का काम परिवार का ही कोई सदस्य करता हैं कम्पनी एक नया ऑटोमैटिक पलांट लगाने जा रही हैं जिसकी उत्पादक क्षमता 30 से 40 टन पापड़ रोज बनाने की हैं

कम्पनी का नाम 420 पूरी तरह जुड़ा हुआ हैं गाड़ी का नम्बर, टेलीफ़ोन नम्बर हर जगह 420 की मौजूदगी देखी जा सकती हैं कभी इस नम्बर को कोई लेना नहीं चाहता था आज हमें इस नम्बर के लिए पैसे देनी पड़ती हैं कम्पनी सामाजिक कार्यो में भी बहुत काम करती हैं

कम्पनी का कहना हैं की फिलहाल पापड़ क्षेत्र की नामी कम्पनी लिज्जत पापड़ से काफी पीछे हैं लेकिन हमें भरोसा हैं की एक दिन हम उन्हें भी पीछे छोड़ेगें

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