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कागज का करिश्मा - Success Stories Of Indian Entrepreneurs In Hindi

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Inspirational Stories Of Success In Hindi 

एक सफल उद्योगपति की कहानी
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प्लास्टिक के बाद पर्यावरण के लिए थर्मोकोल नई चुनौती बन कर उभरा हैं ऐ दोनों सामान्य ढंग से नष्ट नहीं होते खाने – पीने के आयोजन में थर्मोकोल की बनी प्लेटों का प्रचालन काफी बढ़ा हैं थर्मोकोल के बढ़ते प्रयोग से स्वस्थ बिगरने का खतरा बढ़ गया हैं क्योकि इसमें कैंसर कारक तत्व पाया जाता हैं और यह सड़ते गलते नहीं हैं जिसके कारण पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा हैं इसी वजह से वेदकृष्ण झुनझुनवाला को कुछ नया करने की प्रेरणा दी

झुनझुनवाला ने विदेश से कुछ मशीन मंगाई और फैजाबाद में कम्पनी की शरुआत की इन मशीनों से गन्ने की लुगदी से प्लेट बनने लगी एक दिन में गन्ने की लुगदी से 8 – 10 लाख प्लेट बनने लगे वेद कहते हैं की हमारे प्लेट में खाना खाइए और उसके बाद जमीन में गाड़ दीजिये यह आपकी सेहत की रक्षा भी करेगी और कुछ समय के बाद यह खाद में बदलकर जमीन की उर्वरक क्षमता भी बढ़ा देगी

फैजाबाद में वेदकृष्ण झुनझुनवाला का परिवार कागज के कारोबार के लिए जाना जाता हैं विष्णुदयाल वेद के दादा थे जिन्होंने चीनी मील से कारोबारी दुनिया में कदम रखा था। विष्णुदयाल के छ: बेटे थे जिनमे वेद के पिता कृष्ण कुमार सबसे छोटे थे 1976 में विष्णुदयाल के परिवार में बटवारा हो गया कृष्ण कुमार के हाथ कुछ खाश नहीं आया उन्होंने खेती में हाथ आजमाया लेकिन कामयाब नहीं हुए तब उन्होंने 1981 में कृष्ण कुमार ने अपने छोटे बेटे के नाम से यश पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कम्पनी की स्थापना की इस कम्पनी में उस समय रोजाना पांच टन कागज बनता था उस समय लौटरी का चलन था तो लौटरी टिकेट के कागज को रीसाइकिल करके कागज बनाया जाता था
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धीरे – धीरे यह कारोबार बढ़ने लगा. 1991 में इन्होने एक और पेपर मिल लगाई अब इनकी कम्पनी देश में प्रशिधि पाने लगी यहाँ 30 से 35 टन कागज रोज बनने लगा कृष्ण कुमार को एक चीज परेशान कर रही थी उनको 30 – 35 लाख हर महीने बिजली के लिए खर्च करने पड़ते थे तो उन्होंने एक क्रांतकारी कदम उठाया कारखाने में लगे ब्वायलर चावल की भूसी से चलाये जाते थे कृष्ण कुमार ने चावल की भूसी से चलने वाला ढाई मेगावाट क्षमता वाला पॉवर प्लांट भी कागज के कारखाने के साथ लगा लिया जिसमे एक ही भाप का प्रयोग टरबाइन चलाने और फैक्ट्री में बनाने कागज को गरम करने के लिए किया जाता हैं

1990 के दसक में इस कम्पनी का निर्यात कुछ भी नहीं था आज इनका 25 प्रतिशत से अधिक का निर्यात करने लगे हैं अमेरिका, यूरोप के साथ कई देशो में यश पेपर के कागज का नर्यात होता हैं वेद बताते हैं की हमने दक्षिण भारत की कम्पनी कावेरी पेपर्स का अधिग्रहण किया अब हम खाने और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में प्रयोग होने वाले कागज के लिए एक पलांट लगाना चाहते हैं

वेद बताते हैं की अगले वर्ष हम मशरूम का प्रयोग करके ऐसा प्रोडक्ट बनाना शुरू कर देंगे जो टीवी, फ्रिज, को पैक करने वाले मोटे थर्मोकोल का शुरक्षित विकल्प होगा हम ऐसा लोचेदार और मजबूत कागज भी बनायेंग जो पौलिबैग का जगह ले सके

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