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महंगे के मुकाबले सस्ता और टिकाऊ - Success Stories of Indian Entrepreneurs in Hindi

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आप किसी भी रिटेल स्टोर चेन में 499 रूपये का जूता बिकता दिखे तो आप समझ जाए की इनका आगरा कनेक्सन हैं आगरा के फ्रेंड्स कलोनी में लामोस ग्रुप का कॉर्पोरेट ऑफिस हैं लामोस ग्रुप के मैनेगिंग हेड नकुल मनचंदा हैं नकुल बताते हैं की हमारी कम्पनी के जूते हर उस कठिन परीक्षा से पास होने के बाद ही बाज़ार में आता हैं जिनसे महंगे जूते गुजरते हैं इसके वावजूद हमारी कम्पनी के जूते 499 रूपये में मिलते हैं

लामोस ग्रुप की यही खासियत हैं की यहाँ के बने जूते 499 रूपये के जूते भारतीय बाज़ार में एक ब्राण्ड बन कर उभरे हैं यह जूते के फिनिशिग और मजबूती में किसी भी महंगे ब्राण्ड से कमजोर नहीं हैं अंतर इतना हैं की महंगे जूते चमड़े के बने होते हैं और लामोस ग्रुप के जूते पीवीसी के बने होते हैं लामोस ग्रुप ने पीवीसी के सस्ते जूते बनाकर भारतीय बाज़ार पर कब्ज़ा कर लिया हैं यह देश की एकमात्र कम्पनी हैं जो हर महीने 499 रूपये वाले एक लाख जोड़ी जूते बाज़ार में उतार रही हैं इस कम्पनी के एक और खासियत यह हैं की एक प्रकार और एक रंग के केवल छ: सौ जोड़ी जूते ही बनते हैं 

लामोस ग्रुप की कामयाबी का सफ़र कई परेशानियों से होकर गुजरा हैं नकुल के परिवार भारत – पाकिस्तान के बटवारे का दंस झेला हैं  नकुल के दादा लोकनाथ मनचंदा पाकिस्तान छोड़ कर भारत आये  यहाँ काशीपुर चीनी मिल में नौकरी की और 1950 में पुरे परिवार समेत आगरा आकार बस गए  1975 में लोकनाथ ने लामोस ग्रुप की स्थापना की लामोस एक रुसी शब्द हैं जिसका अर्थ हैं कुदरत की आदालत आगरा में एक छोटी सी दुकान खोली महज 2500 रूपये की लागत से उन्होंने जूतों का कारोबार शुरू किया 

1990 में आगरा के शाहगंज में लामोस ग्रुप ने अपनी पहली जूता फैक्ट्री लागाई  1996 में लामोस ग्रुप के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ अजय चैनैई के दौरे पर थे उन्होंने यहाँ पर वहा की प्रतिष्ठित रिटेल चेन सर्वाना ग्रुप के मालिक को अपनी जूते के नमूने दिखाए वह आश्चर्ज में पर गए, की वह वे जूते जो उस वक़्त वह चार सौ रूपये में अपने स्टोर के लिए खरीदते थे उससे अच्छे जूते लामोस ग्रुप 265 रूपये में उपलब्ध करा रहा था सर्वाना ग्रुप ने लामोस ग्रुप को 2400 जोड़े जूते बनाने के आर्डर दे दिया इसके बाद चैनैई में लामोस ग्रुप के जूते धूम मचाने लगे और इस वजह से लामोस ग्रुप की भी कारोबार बढ़ने लगा 

लामोस ग्रुप के काम से प्रभावित होकर सर्वाना ग्रुप ने जूतों के कारोबार में अपना बाइंग एजेंट बना दिया काम बढ़ने लगा था थो कम्पनी ने दिल्ली में एक ए टू जेड बाइंग हाउस की स्थापना की कुछ ही वर्षो में कम्पनी ने 100 करोड़ का सालाना कारोबार तक पहुच गई नकुल बताते हैं की सस्ते जूते बनाने वाली कम्पनी टैक्स से बचने के लिए अपने जूतों पर किसी प्रकार का अधिकतम खुदरा मूल्य एमआरपी का जिक्र नहीं करती हैं ए जूते मनमर्जी दामो पर बेचे जाते थे हमने पहली बार एमआरपी लिखे सस्ते जूतों का निर्माण शुरु किया शरुआत में 499 रूपये की कीमत वाले गुणवतापरक जूतों के निर्माण पर ध्यान लगाया गया

नकुल दावा करते हैं की हमारा 499 रूपये का जूता देश में किसी भी बड़े ब्राण्ड के जूते से हर मामले में बराबरी कर सकता हैं लामोस ग्रुप के सस्ते जूतों को सबसे पहले एक्शन ग्रुप ने पहचाना और 2012 में 20,000 जोड़ो जूतों का आर्डर दिया इस जूतों की पहचान बाज़ार में अच्छी बन गई तो आज दो दर्ज़न से ज्यादा कम्पनियों ने लामोस ग्रुप से जूते लेना शुरू कर दिया नकुल ने 2015-16 में दो फक्ट्री लगाई नकुल बताते हैं की अगले एक वर्ष के भीतर हमारी कम्पनी 2,00,000 जोड़ी जूतों का निर्माण शुरु कर देगी नकुल ने लगातार इनोवेसन की बदौलत अपनी कम्पनी को आगे बढ़ाया हैं और इस क्रम में बेहतरीन जूते आम लोग तक पंहुचा दिया हैं

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